रामायण कब घटित हुई थी इसके प्रमाणिक तथ्य क्या है?

रामायण सम्पूर्ण हिंदू धर्म का सबसे पवित्र ग्रन्थ है जो किसी भी रूप में काल्पनिक नहीं है। रामायण सम्पूर्ण सत्य कथा है जो अब प्रमाणित भी हो चुकी है 

लेकिन आज भी रामायण के संदर्भ में कई प्रकार के प्रश्न उठाये जाते है जिनमे से एक यह की रामायण कब हुई थी इसके प्रमाणिक तथ्य क्या है? रामायण कौन से युग में हुई थी? रामायण का समय कौन सा था? रामायण की उत्पत्ति कैसे हुई? रामायण को किसने लिखा? रामायण कितने वर्ष पहले हुई थी? रामायण कब लिखी गई थी?।

ऐसे बहुत से सवाल है जो सम्पूर्ण रामायण और इसकी सत्यता पर उठाये जाते। आज हम इन्ही सवालों के जवाब को ढूंढेगे। 
रामायण कब घटित हुई थी

आज भी कई लोग रामायण की कथा तथा रामायण कब हुई थी इसकी पूर्ण जानकारी ना होने के कारण अनेको बार रामायण के घटित होने का समय कुछ हज़ार वर्ष पूर्व ही बताते है।

 

जबकि रामायण सम्पूर्ण में यह वर्णित है की भगवान राम त्रेतायुग में अवतरित हुऐ थे और सनातन साहित्य के अनुसार स्वंय त्रेतायुग की समय अवधि को 12, 96,000 वर्ष का माना गया है और रामायण का कालखंड त्रेतायुग के अंतिम चरण में घटित हुआ था।

रामायण कब घटित हुई थी? When did Ramayana happen?

रामायण कब घटित हुई थी या कहे की रामायण कितने समय पहले हुई थी, चलिए अब पहले इन तथ्यों पर आते है, आजकल जिस सिद्धान्तो या थ्योरी के बलबूते पर आज के वैज्ञानिक पुरातत्व का आकलन कर रहे है, वो पूर्ण रूप से कपोल कल्पनाओ पर आधारित सा लगता है। वैदिक गणना के अनुसार हम काल की गणना को 0 से लेकर चले है। जैसे आज इस सृष्टि को निर्मित हुए 1,96,08,53,121, वर्ष हो चुके है।
 

लेकिन इसके विपरीत पाश्चात्य पद्धति के वैज्ञानिक -ive चलते है। उनका  यह मानना है, की काल गणना केवल ईसा के जन्म से निर्धारित है, उससे पहले तो शायद दुनिया का अस्तित्व ही नहीं था। लेकिन जब इन्होने देखा कि भारतवर्ष का इतिहास तो इससे भी अधिक वर्ष पुराना रहा है, तब इन्होने AD( Anno Domini) यानिक ईसा के बाद और BC (Before Christ) ईसा पूर्व की कल्पना को गढा।

 

दुर्भाग्यवश भारत मे अधिकतर इतिहासकार भी वामपंथी विचाधारा से ही प्रेरित है। यह एक ऐसे लोगो का समूह है, जो हमेशा से सनातन धर्म और रामायण के अस्तित्व को नकारता रहा है। रामायण कब हुई थी इसे ये एक कल्पना ही मानते है। 

ये सभी वामपंथी इतिहासकार हमेशा से विदेशी काल मार्क्स और लेनिन के विचारो से प्रेरित रहे है। इसलिए ये इतिहासकार केवल सुनी सुनाई बातो को लिखते रहे है, इन्होने कभी कुछ भी धरातल पर उतरकर नही लिखा। 

लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने रामायण और महाभारत कब हुई थी इससे सम्बंधित साक्ष्य को मांगे और जब वैदिक सनातन विद्वानों ने रामायण और महाभारत से सम्बंधित साक्ष्यों को प्रस्तुत किया गया तब जाकर इन पाश्चात्य एवं वामपंथियो इतिहासकरो की पोल पट्टी खुली, कैसे इन्होने सम्पूर्ण रामायण के कालखंड और महाभारत की घटनाओ को केवल कल्पना मात्र कहाँ था।

रामायण के प्रमाणित तथ्य कौन से है? What are the proven facts of Ramayana? 

वैदिक साहित्य के अनुसार आज से 5550 वर्ष पूर्व महाभारत का युद्ध हुआ था। जो की द्वापरयुग के अंत मे हुआ था। जबकि रामायण का घटनाक्रम तो त्रेतायुग का है। सबसे पहले हम रामायण के काल खंड की गणना पर आते है।

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वैदिक गणित के अनुसार रामायण कब हुई थी इसे समझते है, रामायण का काल खंड इस समय चल रहे वैवस्वत मन्वंतर के 28 वे चतुर्युगी (महायुग) के त्रेतायुग का है। वैदिक गणित/विज्ञान के अनुसार ये सृष्टि 14 मन्वंतर तक चलती है और प्रत्येक मन्वंतर मे 71 चतुर्युगी (महायुग) होते है। 

1 चतुर्युगी मे 4 युग होते है - सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग एवं कलियुग होते है। वैदिक गणना के अनुसार अब तक 6 मन्वंतर बीत चुके है और यह 7 वाँ मन्वंतर चल रहा है, जो की वैवस्वत मन्वंतर है, जो इस समय चल रहा है।

सनातन गणना के अनुसार सतयुग का कालखंड 17,28,000 वर्षो का है, इसी प्रकार त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष का, द्वापरयुग 8,64,000 वर्ष का एवं कलियुग 4,32,000 वर्ष का है। वर्तमान मे 28 वी चतुर्युगी (महायुग) का कलियुग चल रहा है। 

भगवान श्रीराम के जन्म और हमारे आधुनिक समय के बीच में द्वापरयुग का काल खंड है। जो कि 8,64,000 वर्ष का है। अभी तक वैदिक गणना के अनुसार कलियुग के लगभग 5200 वर्ष बीत चुके है। इसका साक्ष्य इस प्रकार है:- 

महान गणितज्ञ एवं ज्योतिष वराहमिहिर के अनुसार

असन्मथासु मुनय: शासति पृथिवी: युधिष्ठिरै नृपतौ:
षड्द्विकपञ्चद्वियुत शककालस्य राज्ञश्च:

अर्थात जिस समय धर्मराज युधिष्ठिर राज्य कर रहे थे, उस समय की काल गणना के अनुसार सप्तऋषि मघा नक्षत्र मे विराजमान थे। वैदिक गणित मे 27 नक्षत्र होते है और सप्तऋषि प्रत्येक नक्षत्र मे 100 वर्ष तक विराजमान रहते है। ये चक्र इसी प्रकार चलता रहता है। 

धर्मराज युधिष्ठिर के समय में सप्तऋषियो ने 27 नक्षत्रो का एक चक्र पूर्ण कर लिया था जिसके बाद अब तक 24 चक्र पूर्ण हो चुके है अर्थात कुल मिलाकर (27 + 24) 51 चक्र हो चुके है हमारे सप्तऋषि तारा मंडल के। अत: इस गणना के हिसाब से अब तक कुल वर्ष व्यतीत हुए 51×100= 5100 वर्ष। 

धर्मराज युधिष्ठिर ने लगभग 38 वर्षो तक शासन किया था। तथा उसके कुछ समय बाद ही कलियुग का आरम्भ हुआ था, अत: इस गणना से हम यह मानकर चलते है, कि कलियुग के कुल 5155 वर्ष अब तक बीत चुके है।

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इस प्रकार कलियुग से लेकर द्वापरयुग तक का कुल समय = 8,64,000 + 5155 = 8,69,155 वर्ष बीत चुके है।

रामायण सम्पूर्ण कथा के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म त्रेतायुग के अंत मे हुआ था। इस प्रकार कम से कम 9 लाख वर्ष के आस पास ही भगवान श्रीराम और रामायण का काल खंड की गणना की जा सकती है।

रामायण कब हुई थी इसे प्रमाणित करने के लिए अब हम एक दूसरे तथ्य पर आते है।

रामायण के किष्किंधाकांड खंड के 5 वे भाग के श्लोक 12 मे महर्षि वाल्मीकि जी लिखते है-

वारणैश्चै चतुर्दन्तै श्वैताभ्रनिचयोपमे
भूषितं रूचिद्वारं मन्तैश्च मृगपक्षिभि:।।


ramayan kab gahatit hui thi


अर्थात् जब श्री हनुमान जी वन मे श्रीराम और लक्ष्मण के पास जाते है, तब वह सफेद रंग के 4 दांतो वाले हाथी को देखते है। इस तरह के हाथी के जीवाश्म सन 1870 मे मिले थे। कार्बन डेटिंग पद्धति से जब इनकी आयु का पता लगाया गया तब इनकी आयु लगभग 10 लाख से लेकर 50 लाख वर्ष के आसपास निकलती थी। 

वैज्ञानिको ने इस हाथी के जीवाश्म को Gomphothere नाम दिया है। इसी तरह से रामायण के लगभग 10 लाख साल पहले के आस पास घटित होने के बहुत से वैज्ञानिक प्रमाण भी आज उपलब्ध है।

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रामायण कब हुई थी इससे सम्बंधित कुछ और तथ्य 

विचित्र किस्म की प्रजातियां : जब रामायण की रचना हुई तो इसके रचनाकार महर्षि वाल्मीकि ने इसका उल्लेख किया है की भगवान राम के काल में धरती पर विचित्र किस्म के लोग और प्रजातियां रहती थीं, जैसे, वानर, गरूड़, रीछ आदि, उस समय मनुष्यो की ऊंचाई 21 फिट के लगभग थी। आज इनके वैज्ञानिक तथ्य भी मौजूद है। 

वानर जाति : रामायण काल में वानरो को बंदर नहीं माना जाता था। उस समय के अनुसार 'वानर' का अर्थ था- वह नर जो वन में रहता है। जीवविज्ञान के शोध कर्ताओ के अनुसार 'कपि' का अर्थ मानव की एक ऐसी प्रजाति थी जिसमे छोटे आकार के गिबन, सियामंग आदि आते थे।

रावण का महल: रावण के महल के अवशेष आज भी श्री लंका में मौजूद हैं। जिसे महाबली हनुमान ने जला दिया था। जिसे श्री लंका सरकार ने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सुरक्षित रखा है। और रामायण के घटनाक्रम को आधिकारिक तौर पर प्रमाणित भी किया है। 

रामायण कालीन हवाई अड्डे: श्रीलंका की रामायण अनुसंधान समिति ने रामायण काल ​​के दौरान के 4 हवाई अड्डों को खोजने का दावा किया है।
समिति के अध्यक्ष अशोक केंथ का कहना है, कि रामायण में वर्णित लंका नगरी ही वास्तव में आज ही की श्रीलंका है जहां उसंगोडा, गुरुलोपोथा, तोतुपोलकंद और वरियापोला नामक चार हवाई अड्डे पाए गए हैं।

अशोक वाटिका: अशोक वाटिका लंका में स्थित है, जहां सीता का हरण करने के बाद रावण को बंधक बना लिया गया था। ऐसा माना जाता है कि सीता माता को एलिया पर्वत क्षेत्र की एक वाटिका में रखा गया था, यहाँ पर लोग माता सीता को 'सीता एलिया' के नाम से पुकारते है। यहाँ पर माता सीता का एक मंदिर भी है।

द्रोणगिरि पर्वत: यह वह पर्वत है जिसे हनुमान जी लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर हिमालय से उठाकर लाये थे। उसके बाद वह पर्वत श्रीलंका में रह गया था, आज उस पर्वत पर कई अनुसंधान हो चुके है जो यह साबित करते है की इस पर्वत की मिट्टी श्रीलंका की मिट्टी से भिन्न है और यह हिमालय की मिट्टी से मेल खाती है।     

राम सेतु: राम सेतु, जिसे अंग्रेजी में एडम्स ब्रिज के रूप में भी जाना जाता है, भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच निर्मित पत्थर के पुलों की एक श्रृंखला है। भौगोलिक साक्ष्य से पता चलता है कि किसी समय यह पुल भारत और श्रीलंका को भूमि मार्ग से जोड़ता था। यह पुल करीब 18 मील (30 किमी) लंबा है।

ऐसा माना जाता है कि 15वीं शताब्दी तक यह पैदल चलने योग्य था। चक्रवात और समुंद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण यह पुल अपने पूर्व स्वरूप में नहीं रहा। राम सेतु एक सुर्खियों में तब आया जब नासा के सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों ने मीडिया में सुर्खियां बटोरीं।

सुग्रीव की गुफा: यह गुफा ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित है जो कर्नाटक राज्य के हम्पी में स्थित है, यही पर सुग्रीव अपने भाई बाली के भय से रुके थे, यह गुफा आज भी मौजूद है। 

यह सब वो साक्ष्य है जो रामायण के समय में होने वाली घटनाओ को प्रमाणित करती है। इसलिए रामायण कब घटित हुई थी इसे प्रमाणित करने के लिए आज ऐसे कई साक्ष्य मौजूद है।

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रामायण कितने वर्ष पहले हुई थी?

वैदिक गणना के अनुसार रामायण का कालखंड 9 लाख वर्ष पूर्व का माना जाता है।

रामायण की शुरुआत कब से हुई?

रामायण सम्पूर्ण एक बहुत ही सफल भारतीय टीवी शृंखला है, जिसका निर्माण, लेखन और निर्देशन रामानन्द सागर जी के द्वारा किया गया था। 78-एपिसोड के इस महाकाव्य रूपी धारावाहिक का मूल प्रसारण दूरदर्शन पर 24 जनवरी 1987 से 31 जुलाई 1988 तक रविवार के दिन सुबह 9:30 बजे किया गया था। 

भगवान राम का जन्म कब हुआ था?

रामायण के अनुसार भगवान राम का अवतरण चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। हर साल इस दिन रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है।   


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2 Comments

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  1. महोदय आपके द्वारा लिखा गया है : "वारणैश्चै चतुर्दन्तै श्वैताभ्रनिचयोपमे, भूषितं रूचिद्वारं मन्तैश्च मृगपक्षिभि:" सुन्दरकाण्ड के सर्ग ५ का बारहवाँ श्लोक है. यह श्लोक किष्किन्धाकाण्ड से आपके बताये स्थान तक कहीं भी नहीं मिला. कृपया त्रुटि सुधार कर अपने लेख को समृद्ध करें.

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    1. धन्यवाद रवि मिश्रा जी जो आपने हमारी त्रुटि की और ध्यान आकर्षित किया इसके लिए हम आपके आभारी है। हिंदी वेब बुक अपने सभी पाठकों से ऐसी ही अपेक्षा की आशा रखता है जो अपने ज्ञान और सुझाव से हमारा मार्गदर्शन करते रहें। ताकि हम अपने सभी पाठको को त्रुटि विहीन जानकारियाँ उपलब्ध कराते रहे।

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